गेंदा फूल सांग की असली कहानी जानिये |

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मुझे बांग्ला नहीं आती पर। पर रतन क़हार के दर्द को समझ के लिए किसी भाषा की ज़रूरत नहीं है। इनकी आवाज़ में मौजूद बेबसी ही पूरी कहानी बायाँ कर रही है। रतन का घर गिरा दिया गया है, और अब रतन पूछ रहे हैं कि मैं कहां जाऊँगा। कौन हैं ये रतन क़हार। क्या ज़रूरत है इनके बारे में बात करने की। आपके मन में आने वाले ये सवाल वाजिब हैं। इस टूटी हुई झोपड़ी की तरह ही रतन की पहचान भी मिट्टी में गुम हो गई है। रतन कहते हैं मैं मिट्टी के पास रहता हूँ इसलिए मिट्टी से जुड़े गाने लिखता हूँ। बोरो लोकेर बिटी लो वाला गाना मैंने 1972 में लिखा था। एक बार मशहूर कलाकार परितोष राय मुझसे मिलने आए।

उन्होंने मुझे एक phorm दिखाया, जिस पे मेरे गाने लिखे थे। परितोष ने जबरन मुझसे उस फ़ॉर्म पे दस्तख़त कारा लिए। 1976 ये गाना रिलीज़ हुआ और देखते ही देखते इसकी पोप्यूलरिटी आसमान छूने लगी। पर रतन क़हार को कुछ भी नहीं मिला। गाने की क्रेडिट में रतन का नाम शामिल नहीं किया गया। अपनी ज़िंदगी के तमाम अनुभवों को शब्दों में पिरो कर गीत लिखने वाले गीतकार रतन गुमनामी के अंधेरों में कहीं गुम हो गए। ४५ बाद साल समय ने फिर से करवट बदली। सोनी म्यूज़िक ने बादशाह और पायल देव की आवाज़ में बोरो लोकेर बिटी लो वाले गाने का rimix वर्ज़न फिर से रिलीज़ किया है। इस गाने ने सफलता के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं।

यूट्यूब पर आठ करोड़ से भी ज़्यादा लोग इस गाने को देख चुके हैं और इस म्यूज़िक वीडियो को बनाने वाले प्रोड्यूसर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं पर अफ़सोस रतन का वक्त अभी भी नहीं बदला। इस बार भी गाने में रतन को कोई क्रेडिट नहीं मिला। रतन कहते हैं इस गाने का शब्द, संगीत सब कुछ मेरा है। अब अगर लोग बेईमान निकल जाते हैं तो मैं क्या कर सकता हूँ। लोग मेरे गाने ले लेते हैं और मेरा नाम तक नहीं देते। मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि गाना चुराने वालों को कोर्ट में घसीट सकूँ। रतन को लेकर जब सोशल मीडिया पे सवाल पूछे जाने लगे तो बादशाह सामने आए और कहा कि हम रतन क़हार की पूरी मदद करेंगे। अपनी पूरी ज़िंदगी लोककला को समर्पित कर देने वाले रतन क़हार क्या यहीं डिज़रब करते हैं?

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