जब एक मुस्लिम अध्यापक को मिला संस्कृत पढ़ाने का मौका

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    BHU के कुछ ढपोरशंख संस्कृत विभाग में मुस्लिम अध्यापक फ़िरोज़ खान की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं। डॉ. फ़िरोज़ के पिता और भाई संस्कृत के अच्छे ज्ञाता हैं। साथी फ़िरोज़ ने अच्छी शिक्षण संस्थाओं से उच्च शिक्षा प्राप्त की है, साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से पीएचडी की है। वे संस्कृत में NET-JRF भी हैं। BHU के पंडों के लिए यहाँ कुछ तथ्य सामने रखना चाहता हूँ-
    -BHU एक धर्म संस्था नहीं, UGC द्वारा फंडेड एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है इसलिए नियुक्ति योग्यता से होगी, जाति-धर्म देखकर नहीं।
    -वेदों को मुद्रित प्रकाशित करने, आधुनिक काल में व्यवस्थित अध्ययन शुरू करने और पश्चिमी देशों में लोकप्रिय बनाने का काम किसी पंडे ने नहीं, बल्कि मैक्समूलर और अन्य प्राच्यविदों ने किया।
    -दुनियाभर के इंडोलॉजी विभागों में हिन्दू धर्मशास्त्रों की पढ़ाई होती है और ज्यादातर अध्यापक ईसाई और मुसलमान हैं। उनका ज्ञान हिन्दू पंडों से किसी मामले में कम नहीं है।
    ढपोरशंखों, अगर कोई दूसरे धर्म का व्यक्ति तुम्हारी भाषा सीख रहा है तो इससे बिना मेहनत तुम्हारी भाषा और धर्म का प्रचार हो रहा है, फिर काहे मातम मना रहे हो?
    साभार

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